क्या हनुमान शिव के अवतार है? आइये जानते हैं।

आजकल के इस दुनिया में कुछ विशेषज्ञ और पुराण यह बताते हैं कि भगवान शिव ने श्री हनुमान जी का अवतार लिया था हम सब जानते हैं कि शिव जी ने बहुत से अवतार लिए थे उनमें से ही एक अवतार माना जाता है हनुमान जी का। जाने वाले यह कहते हैं कि यह पुष्टि कर ली गई है कि भगवान शिव ने भगवान हनुमान जी का रूप लिया था पर हमें अभी तक यह नहीं पता कि उन्होंने यह रूप क्यों लिया था। इन सब बातों पर रोशनी डालते हुए हम कुछ पुरातत्व की जानकारी देना चाहते हैं , भगवान शिव ने आज तक 12 रुद्र प्रताप लिए हैं उनमें से एक था हनुमान जी का, शिव महापुराण में हमें उनके 12 रुद्र अवतारों के बारे में जानकारी मिल सकती है वहां पर उनका वर्णन और उनका कारण स्पष्ट शब्दों में बताया गया है। यह स्पष्ट शब्दों में कहा जाता है कि हां हनुमान जी शिव जी के ही अवतार थे उन के 11 रुद्र अवतार श्री हनुमान जी का जन्म इस पृथ्वी पर रावण के वध के समय हुआ था और उन्होंने अपनी सेवा और वरदान को निभाते हुए श्री राम की सहायता की।

Hanuman- Shiv

हनुमान जी का जन्म क्यों हुआ?

चैत्र युग में भगवान हनुमान जी के दो जन्म तिथि के बारे में वर्णन किया गया है उनकी माता अंजनी शिव जी की बहुत बड़ी भक्त थी उन्होंने घोर तपस्या करके यह वरदान मांगा था कि वह शिव जी को अपने पुत्र के रूप में पाना चाहती है और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिव जी ने हनुमान जी का रूप लेकर चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को जन्म लिया। कहा तो यह भी जाता है कि वह अभी भी पृथ्वी पर संभव तौर पर जीवित है और वह लोगों के दुख और दर्द को मिटाते हैं क्योंकि कहा जाता है कि कलयुग में कोई भी भगवान का अवतार पृथ्वी पर जीवित नहीं रहता तो इसलिए शिव जी ने अपना इस रूद्र अवतार एक वानर के तौर पर जन्म इसलिए लिया था ताकि वह लोगों की सहायता कर सकें।

पौराणिक कथाओं के अनुसार?

पुरानी किताबों और ग्रंथों के अनुसार रावण का अंत करने के लिए श्री विष्णु जी ने राम जी का अवतार लिया था और उसी समय कई देवताओं ने अलग-अलग अवतार लिए थे ताकि वह रावण का अंत करने में श्री राम की सहायता कर सकें। और उसी समय भगवान शिव ने अपना रुद्र अवतार लिया था उनका 11 अवतार श्री हनुमान जी। कथाओं के अनुसार यह कहा जाता है कि भगवान शिव को विष्णु भगवान से एक वरदान प्राप्त हुआ था वह वरदान था एक दास्य का। और भगवान शिव ने हनुमान बनकर उसी समय जन्म लिया तो उस समय उन्होंने श्री राम की सेवा भी की और रावण वध में उनका साथ दिया। ऐसी काफी कहानियां और कथाएं हम पढ़ सकते हैं कुछ पौराणिक किताबों में ऐसे कई विशेषज्ञों ने इन सारी कथाओं के बारे में पुष्टि और सुबूत भी दिए हैं।

जनम होंने से पहले?

जब भगवान शिव का हनुमान जी का अवतार लेने का समय आया तो उस वक्त उन्होंने पार्वती जी को बोला कि अपने अपने राम के दर्शन के लिए पृथ्वी पर जा रहा हूं और उस वक्त पार्वती जी विचलित होकर कहने लगी कि मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती मैं निश्चित ही तौर पर अपनी जान दे दूंगी तो उस समय भगवान शिव एक मोह के जाल में फंस गए थे एक तरफ पार्वती जी का मोह और एक तरफ अंजनी मां का वरदान और एक तरफ श्री राम की सेवा। तो उन्होंने पार्वती मां को अपनी 11 रुद्र अवतार के बारे में सब बताया उन्होंने बोला कि एक वक्त ऐसा आएगा कि श्री राम को मेरी सहायता की जरूरत पड़ेगी और इसीलिए उन्हें जाना पड़ेगा उन्होंने पार्वती मां को यह भी बताया कि वह एक वानर का अवतार लेने वाले हैं और वह श्रीराम के जीवन काल के बारे में सब जानते थे इसलिए उन्हें मोह माया त्याग कर सेवा करनी पड़ेगी। तो इसी अनुसार उन्होंने श्री हनुमान जी के तौर पर पृथ्वी पर जन्म लिया और सारी मोह माया त्याग कर श्री राम की सेवा की उन्होंने उनकी सहायता भी की जब रावण का वध हुआ ऐसा ही कहा जाता है कि कई देवताओं ने उनकी सहायता करने के लिए पृथ्वी पर जन्म लिया और वह एक-एक करके गायब होते रहे।

कुछ राज?

आज की पौराणिक कथाओं के अनुसार उनका जन्म एक शक्तिशाली वानर के रूप में हुआ था उन्होंने यह जन्म साक्षात हनुमान जी के अवतार में आकर श्रीराम की सहायता के लिए लिया था पर कहा यह भी जाता है कि वह कलयुग से बुराइयां हटाने के लिए भी जन्म लिए थे।उन्हें यह पता था कि कलयुग के समय में पृथ्वी पर नाही शिवजी नजर आने वाले थे और ना ही श्रीराम तो उन्होंने इसलिए अपने एक शक्तिशाली रूप को पृथ्वी पर जन्म दिया। आज भी माना जाता है कि हनुमान जी पृथ्वी पर जिंदा है ऐसा कहा जाता है और ऐसे कई सबूत भी पाए गए हैं कि लोगों ने उन के साक्षात दर्शन किए हैं। तो आज भी हम कह सकते हैं कि कुछ सुबूत हमें पाए जाते हैं जिनकी पुष्टि करना नामुमकिन होता है और कुछ विशेषज्ञों के अनुसार यह स्पष्ट शब्दों में कहा जा सकता है कि हनुमान जी अभी भी पृथ्वी पर जीवित है लोगों के दुख दर्द को दूर करने के लिए इस शक्तिशाली अवतार को उन्होंने जीवित रखा हुआ है।


निष्कर्ष

ऊपर बताई हुई हर कथा और हर बात के अनुसार निष्कर्ष यह निकाला जाता है कि हां श्री राम जी की सेवा करने के लिए भगवान शिव ने श्री हनुमान जी का अवतार वानर रूप में पृथ्वी पर लिया था उन्हें वरदान था श्री विष्णु जी की सेवा करने का और श्री अंजनी माता को वरदान था भगवान शिव को अपने पुत्र के रूप में पाने का इन सब पर दानों के चलते भगवान शिव को अपने 11 रूद्र अवतार में आना पड़ा यही नहीं हमने यह भी स्पष्ट शब्दों में बताया है कि उनके कई सबूतों के अनुसार आज भी है कहा जाता है कि कई लोगों ने उन के साक्षात दर्शन किए हैं और उनके जिंदा होने की जानकारी आज भी कई विशेषज्ञ जाहिर करते हैं ।

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