गुरुजी को आदेश, गुरुजी को प्रणाम वीर हनुमान एक अत्यंत शक्तिशाली हनुमान भजन एवं मंत्र है, जिसे श्रद्धा और विश्वास के साथ गाया एवं जपा जाता है। यह भजन श्री हनुमान जी की अपार शक्ति, साहस, भक्ति और रक्षा करने वाले स्वरूप का स्मरण कराता है। मान्यता है कि इस भजन का नियमित पाठ करने से भय, नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं से रक्षा होती है तथा जीवन में आत्मबल, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
गुरुजी को आदेश, गुरुजी को प्रणाम वीर हनुमान लिरिक्स
ॐ गुरुजी को आदेश, गुरुजी को प्रणाम।
वीर हनुमान, राम के दूत, माता अंजनी के पूत।
महाबली, शूरवीर, बारह वर्ष का जवान।
हाथ में लड्डू, मुख में पान।
खेल-खेल के लंका के चौगान।
आओ-आओ वीर हनुमान,
पवन वेग से आओ, मेरे काज संवारो।
सात समुद्र लांघ के आओ, लंका जारि भस्म कर आओ।
सिया सुध लाये, लक्ष्मण के प्राण बचाये।
भूत मारो, प्रेत मारो, डाकिनी मारो, शाकिनी मारो।
जिन्न मारो, खबीस मारो, चुड़ैल मारो, मसान मारो।
काल को कीलो, कंटक को कीलो।
नौ खंड के भूत-प्रेत को कीलो।
आगे अर्जुन, पीछे भीम,
जहाँ-जहाँ जाऊँ, तहाँ-तहाँ वीर हनुमान सहाई।
मार-मार, हुंकार मार, गदा की मार।
जो मेरी बात ना माने, जो मेरा काज ना करे,
तो दुहाई राजा रामचन्द्र जी की, दुहाई माता जानकी की।
दुहाई महादेव शिव-शंकर की, दुहाई माता अंजनी की आन।
लोहे की कोठरी, तांबे का ताला,
मेरी रक्षा करे वीर बजरंग बाला।
शब्द सांचा, पिंड काचा।
फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।
सत्य नाम आदेश गुरु का!
ॐ फट् स्वाहा!
गुरुजी को आदेश, गुरुजी को प्रणाम का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से भक्तों को श्री हनुमान जी की कृपा, साहस और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होने की मान्यता है। यह भजन कठिन परिस्थितियों में मन को दृढ़ता, आत्मविश्वास और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास प्रदान करता है। यदि आप हनुमान जी के अन्य भजन, चालीसा, आरती और मंत्र पढ़ना चाहते हैं, तो हमारी वेबसाइट पर उपलब्ध अन्य भक्तिमय सामग्री भी अवश्य देखें।

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