मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डाल दई” में भक्त अपने जीवन की हर मुश्किल और संकट को बजरंगबली के चरणों में सौंपकर उनकी कृपा से जीवन की नैया पार लगाने की प्रार्थना करता है। हनुमान जी की भक्ति और धार्मिक महत्व को समझने पर इस भाव की गहराई और स्पष्ट होती है, क्योंकि हिंदू परंपरा में हनुमान जी को श्रीराम के आदर्श भक्त के रूप में देखा जाता है। इसी कारण हनुमान भक्ति से जुड़े भजनों में विश्वास, सेवा और समर्पण की भावना प्रमुख रूप से दिखाई देती है। “मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान लिरिक्स” खोजने वाले भक्तों के लिए यह भजन इसी अटूट आस्था और भरोसे का भावपूर्ण प्रतीक बन चुका है।
मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान लिरिक्स
मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान,
सागर में नैया डाल दई ॥
काहे की या नाव बनाई,
काहे की पतवार,
रामा काहे की लगा दी जंजीर,
सागर में नैया डार दई,
मैने तेरे ही भरोसे हनुमान,
सागर में नैया डाल दई ॥
राम नाम की नाव बनाई,
भक्ति की पतवार,
ओ रामा ज्ञान की लगा दी जंजीर,
सागर में नैया डार दई,
मैने तेरे ही भरोसे हनुमान,
सागर में नैया डाल दई ॥
कौन सखी वामें बैठनहारे,
कौन है खेवनहार,
रामा कौन लगाहे बेड़ा पार,
सागर में नैया डार दई,
मैने तेरे ही भरोसे हनुमान,
सागर में नैया डाल दई ॥
सीता मैया बैठनहारी,
लक्ष्मण खेवनहार,
मोरे राम जी लगावे बेड़ा पार,
सागर में नैया डार दई,
मैने तेरे ही भरोसे हनुमान,
सागर में नैया डाल दई ॥
तुलसीदास आस रघुवर की,
चरणन में बलिहार,
मोरे बालाजी लगाहे बेडा पार,
सागर में नैया डार दई,
मैने तेरे ही भरोसे हनुमान,
सागर में नैया डाल दई ॥
मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान,
सागर में नैया डाल दई ॥
“मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई” भजन हर उस भक्त की भावना को स्वर देता है, जो जीवन के संकटों में हनुमान जी की शरण लेकर उनसे अपनी नैया पार लगाने की प्रार्थना करता है। यह भजन श्रद्धा और विश्वास को मजबूत करता है और याद दिलाता है कि सच्चे मन से की गई भक्ति भक्त को कठिन समय में भी हिम्मत देती है। हनुमान जयंती जैसे पावन अवसरों पर भी ऐसी भक्ति और भजनों की विशेष महत्ता देखने को मिलती है। हनुमान भक्ति से जुड़े अन्य लोकप्रिय भजनों में राम ही पार लगावेंगे और सकल हंस में राम विराजे जैसे भजन भी शामिल हैं, जिन्हें भक्त श्रद्धा के साथ सुनते और गाते हैं।

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