भगवान हनुमान जी की महिमा का वर्णन करते समय एक विशेष पंक्ति अक्सर याद की जाती है
“राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे।”
इस पंक्ति का अर्थ बहुत गहरा है और यह हनुमान जी के महत्व को अत्यंत सरल भाषा में समझाती है।
इसका सीधा अर्थ यह है कि भगवान श्रीराम के द्वार पर हनुमान जी ही रक्षक के रूप में विराजमान हैं। कोई भी भक्त जो राम के पास जाना चाहता है, उसे पहले हनुमान जी की कृपा प्राप्त करनी होती है। जैसे किसी राजा के महल में प्रवेश करने से पहले द्वारपाल की अनुमति आवश्यक होती है, उसी प्रकार परमात्मा के साक्षात्कार के लिए हनुमान जी की भक्ति और उनका आशीर्वाद मार्ग बनाता है। यहाँ द्वारपाल का अर्थ केवल पहरेदार नहीं है, बल्कि मार्गदर्शक भी है जो भक्त को भक्ति, सेवा, निष्ठा और संयम का रास्ता दिखाते हैं।
हनुमान जी को ब्रह्मचर्य, निष्ठा, पराक्रम और ज्ञान का आदर्श माना जाता है। वे सभी विद्याओं के जानकार हैं। वेद, शास्त्र, व्याकरण, योग, नीति, संगीत और तप में हनुमान जी की अद्भुत दक्षता वर्णित है। इसलिए कहा जाता है कि उन्हें किसी उपदेश की आवश्यकता नहीं होती, वे स्वयं ज्ञान और श्रद्धा के महान आचार्य हैं।
“राम दुआरे तुम रखवारे” यह पंक्ति यह भी बताती है कि ईश्वर के मार्ग में प्रवेश करने से पहले हृदय में विनम्रता और सेवा भाव का होना आवश्यक है। हनुमान जी का जीवन इसी भावना का उत्तम उदाहरण है। उन्होंने अपने समस्त जीवन को भगवान की सेवा में समर्पित किया। यही समर्पण भक्त को सीधे ईश्वर के करीब ले जाता है।
मानव जीवन को देखें तो हनुमान जी यह शिक्षा देते हैं कि मनुष्य का जन्म केवल इंद्रियों के आनंद या साधारण इच्छाओं की पूर्ति के लिए नहीं मिला है। यह जीवन उन्नति, साधना और सदाचार के लिए दिया गया है। मनुष्य का जीवन एक विशाल समुद्र की तरह है जिसे पार करते समय अनेक बाधाएँ सामने आती हैं। रामायण में जब हनुमान जी समुद्र पार कर रहे थे तब सुरसा उनके मार्ग में आई थी। सुरसा वास्तव में जीवन में आने वाली इच्छाओं और लालसाओं का प्रतीक है। जब मनुष्य एक लक्ष्य की ओर बढ़ता है तो मन में अनेक नई इच्छाएँ पैदा होती हैं, जो उसे मार्ग से भटकाने की कोशिश करती हैं।
हनुमान जी ने सुरसा को न तो क्रोध से हराया और न ही बल प्रयोग से। उन्होंने धैर्य, बुद्धिमत्ता और संयम से उस बाधा को पार किया। यह घटना बताती है कि जीवन की कठिनाइयों का समाधान केवल शक्ति से नहीं बल्कि विवेक और शांत मन से होता है। संयम वह शक्ति है जो मनुष्य को बड़ा बनाती है और उसे सही दिशा में चलाती है।
हनुमान जी की कृपा से मनुष्य के जीवन में साहस, भक्ति, धैर्य और निष्ठा उत्पन्न होती है। जब व्यक्ति हनुमान जी के गुणों को अपनाता है तो उसके जीवन का मार्ग स्वतः ही आसान हो जाता है। यही कारण है कि कहा गया है कि हनुमान जी की कृपा से ही भक्त को भगवान श्रीराम के सानिध्य और दर्शन का सच्चा मार्ग मिलता है। इसलिए भक्त को चाहिए कि हनुमान जी की भक्ति, सेवा भावना और संयम को अपने जीवन में अपनाकर आगे बढ़े और अपने लक्ष्य की ओर दृढ़ता से बढ़ता रहे।
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