हनुमान चालीसा हिंदू धर्म का एक अत्यंत लोकप्रिय और श्रद्धेय स्तोत्र है। इसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी। यह स्तोत्र केवल हनुमान जी की शक्ति और पराक्रम का वर्णन नहीं करता, बल्कि श्रीराम के प्रति उनकी अनन्य भक्ति को भी अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। इसी कारण यह प्रश्न भक्तों, शोधकर्ताओं और पाठकों के बीच अक्सर उठता है कि हनुमान चालीसा में “राम” शब्द कितनी बार आया है।
यह लेख इसी प्रश्न का स्पष्ट, तथ्यात्मक और व्यवस्थित उत्तर देता है।
संक्षिप्त और सीधा उत्तर
👉 हनुमान चालीसा में “राम” शब्द कुल 18 बार आया है।
यह संख्या मान्य हनुमान चालीसा पाठ के शब्द-आधारित अध्ययन पर आधारित है और व्यापक रूप से स्वीकृत है।
गिनती का आधार और तर्क
“राम” शब्द की संख्या निर्धारित करते समय निम्न बातों को ध्यान में रखा गया है:
- केवल प्रामाणिक तुलसीदास कृत हनुमान चालीसा को आधार बनाया गया
- “राम”, “रामहि”, “श्रीराम”, “राम काज”, “राम रसायन” जैसे सभी रूपों में “राम” शब्द को शामिल किया गया
- गिनती भाव के आधार पर नहीं, बल्कि शब्द के वास्तविक प्रयोग के आधार पर की गई
- दोहे और चौपाइयाँ, दोनों शामिल किए गए
इस विधि से गिनती करने पर यह स्पष्ट होता है कि हनुमान चालीसा में “राम” शब्द कुल 18 बार आया है।
हनुमान चालीसा में “राम” शब्द का प्रयोग
हनुमान चालीसा की अनेक चौपाइयों में “राम” शब्द प्रत्यक्ष रूप से आता है। कुछ प्रमुख उदाहरण हैं:
- राम दूत अतुलित बल धामा
- राम लखन सीता मन बसिया
- राम रसायन तुम्हरे पासा
- राम काज करिबे को आतुर
- राम दुआरे तुम रखवारे
- राम कृपा करहु तुम राखा
- राम नाम लिव लाए
इसी प्रकार पूरे स्तोत्र में “राम” शब्द 18 बार प्रयुक्त हुआ है, जो इसकी राम-केंद्रित भावना को स्पष्ट करता है।
क्या संख्या को लेकर भ्रम क्यों होता है?
कई बार इंटरनेट या पुस्तकों में 16 या 17 जैसी संख्याएँ भी देखने को मिलती हैं। इसका मुख्य कारण है:
- संयुक्त शब्दों में “राम” को अलग से न गिनना
- अपूर्ण या संशोधित पाठों का उपयोग
- भावार्थ के आधार पर अनुमान लगाना
जब शुद्ध पाठ और शब्द-आधारित विधि अपनाई जाती है, तब संख्या 18 ही सिद्ध होती है।
निष्कर्ष
हनुमान चालीसा में “राम” शब्द कुल 18 बार आया है, यह एक प्रमाणिक, शोध-आधारित और स्पष्ट तथ्य है। यह संख्या केवल गणितीय नहीं, बल्कि हनुमान जी की राम-भक्ति का प्रतीक है।
हनुमान चालीसा हमें यह सिखाती है कि राम-नाम में ही शक्ति, भक्ति और मुक्ति निहित है। यही कारण है कि यह स्तोत्र आज भी करोड़ों भक्तों के जीवन में आस्था और विश्वास का केंद्र बना हुआ है।

No comments
Do not enter any spam link in the comment box