यह भजन “सकल हंस में राम विराजे, राम बिना कोई धाम नहीं” भगवान श्रीराम की महिमा और सर्वव्यापकता को समर्पित एक भावपूर्ण भक्ति गीत है। इसके शब्द भक्त के मन में यह विश्वास जगाते हैं कि संसार के हर कण में प्रभु राम का वास है और उनके बिना जीवन अधूरा है। सरल और मधुर भावों से सजा यह भजन श्रद्धालुओं को प्रभु की भक्ति, प्रेम और शरणागति की अनुभूति कराता है। आगे पढ़ें सकल हंस में राम विराजे राम बिना कोई धाम नहीं लिरिक्स।
सकल हंस में राम विराजे लिरिक्स
सकल हंस में राम विराजे, राम बिना कोई धाम नहीं
हर घट में है जोत है वासा, राम क सुमिरों ने दूजा नहीं।।
तीन गुन पर तेज हमारा, पाच तत्व पर जोत जले
जिनका उजला 14 लोक में, सूरज छोड़ आकाश छड़े
सकल हंस में राम विराजे, राम बिना कोई धाम नहीं
हर घट में है जोत है वासा, राम क सुमिरों ने दूजा नहीं।।
नाभि कमल से परख लेना, ह्रदय कमल बिच फिरे मणि
अनहद बाजा बाजे शहर में, भरमंड पर आवाज हुई
सकल हंस में राम विराजे, राम बिना कोई धाम नहीं
हर घट में है जोत है वासा, राम क सुमिरों ने दूजा नहीं।।
हीरा मोती लाल जवाहर, अरे प्रेम पदा रथ परखो यही
हर घट में है जोत है वासा, राम क सुमिरों ने दूजा नहीं।।
हीरा मोती लाल जवाहर, अरे प्रेम पदा रथ परखो यही
साचा मोती सुमर लेना, राम धनी से मारे डोर लगी
सकल हंस में राम विराजे, राम बिना कोई धाम नहीं
सकल हंस में राम विराजे, राम बिना कोई धाम नहीं
हर घट में है जोत है वासा, राम क सुमिरों ने दूजा नहीं।।
गुरुजन होए तो हेली लो घट में , बाहर शहर में भटको मती
गुरुजन होए तो हेली लो घट में , बाहर शहर में भटको मती
गुरु प्रताप नानक साह के चरणे, भीतर बोले कोई दूजो नहीं
सकल हंस में राम बिराजे, राम बिना कोई धाम नहीं
सकल हंस में राम बिराजे, राम बिना कोई धाम नहीं
हर घट में है जोत है वासा, राम क सुमिरों ने दूजा नहीं।।
“सकल हंस में राम विराजे, राम बिना कोई धाम नहीं” भजन प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट आस्था और समर्पण का सुंदर भाव प्रस्तुत करता है। इसके मधुर बोल भक्तों को राम नाम की महिमा और भक्ति की शक्ति का अनुभव कराते हैं। अगर आपको ऐसे ही भक्तिमय गीत पसंद हैं, तो श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में लिरिक्स भी जरूर पढ़ें और अपने प्रियजनों के साथ साझा करें।
सकल हंस में राम विराजे राम बिना कोई धाम नहीं (भजन लिरिक्स) - Download Now!

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